अयोध्या को भगवान राम की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां हनुमान जी सदैव वास करते हैं। अयोध्या में स्थित तुलसी स्मारक भवन काफी फेमस है. यह महाकवि तुलसीदास को समर्पित है. यह स्मारक भवन तुलसीदास जी के सम्मान में बनाया गया है, जो 'रामचरितमानस' नामक महाकाव्य के लेखक हैं. तुलसी स्मारक भवन उस जगह पर स्थित है जहां तुलसीदास जी का निवास था और जहां से उन्होंने 'रामचरितमानस' लिखने का कार्य किया था. अयोध्या को भगवान राम की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां हनुमान जी सदैव वास करते हैं। इसलिए अयोध्या आकर भगवान राम के दर्शन से पहले भक्त हनुमान जी के दर्शन करते हैं। यहां का सबसे प्रमुख हनुमान मंदिर "हनुमानगढ़ी" के नाम से प्रसिद्ध है। अयोध्या के सूर्यवंशी सम्राट रघु ने इस वंश की नींव रखी थी । रघुवंशी का अर्थ है रघु के वंशज । अंग्रेजी में पुराना नाम "अवध" या "औड" था, और 1856 तक यह जिस रियासत की राजधानी थी, उसे आज भी अवध स्टेट के नाम से जाना जाता है। रामायण में अयोध्या को प्राचीन कोशल साम्राज्य की राजधानी बताया गया है। इसलिए इसे "कोशल" भी कहा जाता था।
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अयोध्या का सर्वोत्तम भ्रमण करने के लिए पूरे दिन का दौरा पर्याप्त होगा। आप रामजन्म भूमि, हनुमान गढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ मंदिर और अन्य प्रमुख आकर्षणों को कवर कर सकते हैं। अयोध्या में कई महान योद्धा, ऋषि-मुनि और अवतारी पुरुष हो चुके हैं. भगवान राम ने भी यहीं जन्म लिया था. जैन मत के अनुसार यहां आदिनाथ सहित 5 तीर्थंकरों का जन्म हुआ था. अयोध्या की गणना भारत के सबसे प्राचीन सात नगरों यानी सप्तपुरियों में पहले स्थान पर की गई है.
जैन परंपरा के अनुसार भी 24 तीर्थंकरों में से 22 इक्ष्वाकु वंश के थे. इन 24 तीर्थंकरों में भी सर्वप्रथम तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव जी) के साथ चार अन्य तीर्थंकरों का जन्मस्थान भी अयोध्या ही है. बौद्ध मान्यताओं के अनुसार बुद्ध देव ने अयोध्या अथवा साकेत में 16 वर्षों तक निवास किया था. यहां बड़े पैमाने पर सूफी संतों के रहने का भी प्रमाण मिलता है. ये समय 12वीं सदी के आसपास बताया गया है.
सरयू नदी के तट पर बसे इस नगर की रामायण अनुसार विवस्वान (सूर्य) के पुत्र वैवस्वत मनु महाराज द्वारा स्थापना की गई थी. वैवस्वत मनु लगभग 6673 ईसा पूर्व हुए थे. वैवस्वत मनु के 10 पुत्र- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध थे. इसे इक्ष्वाकु कुल कहा गया. इसी कुल में आगे चलकर प्रभु श्रीराम हुए. अयोध्या पर महाभारत काल तक इसी वंश के लोगों का शासन रहा.
कहते हैं कि भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने फिर से राजधानी अयोध्या का पुनर्निर्माण कराया था. इसके बाद सूर्यवंश की अगली 44 पीढ़ियों तक इसका अस्तित्व बरकरार रहा. इस वंश का बृहद्रथ, अभिमन्यु के हाथों 'महाभारत' के युद्ध में मारा गया था. महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या उजड़-सी गई.
यह नगर मगध के मौर्यों से लेकर गुप्तों और कन्नौज के शासकों के अधीन रहा. अंत में यहां महमूद गजनी के भांजे सैयद सालार ने तुर्क शासन की स्थापना की. वो बहराइच में 1033 ई. में मारा गया था. उसके बाद तैमूर के पश्चात जब जौनपुर में शकों का राज्य स्थापित हुआ तो अयोध्या उनके अधीन हो गया. विशेषरूप से शक शासक महमूद शाह के शासन काल में 1440 ई. में. 1526 ई. में बाबर ने मुगल राज्य की स्थापना की. उसके सेनापति ने 1528 में यहां आक्रमण करके मस्जिद का निर्माण करवाया, जो 1992 में मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान ढहा दी गई.
वाल्मीकि रामायण के 5वें सर्ग में अयोध्या पुरी का वर्णन विस्तार से किया गया है. बालकांड में कहा गया है कि अयोध्या 12 योजन-लम्बी और 3 योजन चौड़ी थी. सातवीं सदी के चीनी यात्री ह्वेन सांग ने इसे 'पिकोसिया' संबोधित किया है. उसके अनुसार इसकी परिधि 16 ली (एक चीनी 'ली' बराबर है 1/6 मील के) थी. आईन-ए-अकबरी के अनुसार इस नगर की लंबाई 148 कोस तथा चौड़ाई 32 कोस मानी गई है.
अयोध्या घाटों और मंदिरों की प्रसिद्ध नगरी है. सरयू नदी यहां से होकर बहती है. सरयू नदी के किनारे 14 प्रमुख घाट हैं. इनमें गुप्त द्वार घाट, कैकेयी घाट, कौशल्या घाट, पापमोचन घाट, लक्ष्मण घाट आदि विशेष उल्लेखनीय हैं.
यह स्थान रामदूत हनुमान के आराध्य प्रभु श्रीराम का जन्म स्थान है. राम एक ऐतिहासिक महापुरुष थे और इसके पर्याप्त प्रमाण हैं. शोधानुसार पता चलता है कि भगवान राम का जन्म 5114 ईस्वी पूर्व हुआ था. चैत्र मास की नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है. कहते हैं कि 1528 में बाबर के सेनापति मीरबकी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर स्थित मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनवाई थी.
अकबर ने जब 1580 ई. में अपने साम्राज्य को 12 सूबों में विभक्त किया, तब उसने 'अवध'का सूबा बनाया था और अयोध्या ही उसकी राजधानी थी. 1707 ई. में औरंगज़ेब की मृत्योपरांत जब मुग़ल साम्राज्य विघटित होने लगा, तब अनेक क्षेत्रीय स्वतंत्र राज्य उभरने लगे थे. उसी दौर में अवध के स्वतंत्र राज्य की स्थापना भी हुई.
मध्यकालीन भारत के प्रसिद्ध संत रामानंद जी का जन्म भले ही प्रयाग क्षेत्र में हुआ हो, रामानंदी संप्रदाय का मुख्य केंद्र अयोध्या ही हुआ.
अयोध्या जिसे साकेत और रामनगरी भी कहा जाता है। भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक ऐतिहासिक और घार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर है। यह पवित्र सरयू नदी के तट पर बसा हुआ है और अयोध्या जिले का मुख्यालय है। इतिहास में इसे 'कोशल जनपद' भी कहा जाता था। इस वंश का पतन उसके अंतिम राजा अग्निवर्ण के विलासिता की अति के कारण होता है। भगवान श्रीराम की संपूर्ण कथा रामायण में है। रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि हैं।
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